कहानी लिखने के नियम क्या है | रोचक कहानी लेखन के नए तरीके

कहानी सुनने पढ़ने तथा लिखने की प्राचीन परंपरा हमारे देश में रही हैं। प्राचीन काल से ही हमारे देश में विभिन्न प्रकार के कहानीकारों ने विभिन्न प्रकार की कहानियों का वर्णन किया है, जो हमें पढ़ने सुनने में बहुत ही रुचिकर लगती हैं, लेकिन वास्तविकता से उनका कोई संबंध नहीं होता है। कहानी लिखने के नियम क्या है? कहानी लेखन एक हिंदी विधा है, जो लेखक के द्वारा किसी भी घटना को जो वास्तव में घटित नहीं हुई है, उसको इस प्रकार से शब्दों द्वारा वर्णित किया जाता है, कि आंखों के सामने उस वर्णन का वास्तविक चित्र दिखाई देने लगता है। बचपन से ही हम विभिन्न प्रकार की कहानियां सुनते आए हैं।

प्राचीन Stories में दादी- नानी की कहानियां बहुत ही प्रचलित होती हैं, तथा प्रत्येक भारतीय घरों में दादी नानी द्वारा बच्चों को कहानियां सुनाई जाती हैं। यह कहानियां अधिकतर काल्पनिक तथा बच्चों के  मनोरंजन के उद्देश्य से सुनाई जाती हैं, तथा इसमें बच्चों को शिक्षा भी दी जाती है। आधुनिक समय में अभी बहुत सारे लोग ऐसे हैं, जो कहानी लिखना चाहते हैं, और वह कहानी लिखने के नियम क्या हैं? जानना चाहते हैं, तो आज के इस लेख में हम आपको बताएंगे कि कहानी लिखने के नियम क्या होते हैं।

Table of Contents

कहानी लिखने के नियम क्या है

कहानी लिखने के नियम क्या है

स्टोरी लेखन एक ऐसी विधा है जो हिंदी तथा अंग्रेजी साहित्य को एक अलग पैमाने पर खड़ा करती है। कहानी पढ़ना और सुनना जितना आसान होता है, कहानी लिखना उतना ही कठिन होता है, क्योंकि कहानी एक काल्पनिक घटना होती है, जिसे वास्तविक घटना में परिवर्तित करना होता है, तथा परिवर्तन के समय सभी प्रकार के पात्र व घटनाएं ऐसे होते हैं, कि पाठक को पढ़ने में इंटरेस्ट बना रहे तथा प्रत्येक समय उसके दिमाग में क्लाइमेक्स की तरह के विचार आते रहे।

इस में किसी भी जगह पाठक बोर नहीं होना चाहिए, और कहानी का अंत पूरी कहानी का एक सारांश बिंदु के साथ-साथ एक शिक्षाप्रद भी होनी चाहिए, जिससे पाठक को मनोरंजन तथा शिक्षा दोनों मिल सके, तथा उस कहानी के चित्रण से पाठक के दिमाग में एक अलग चित्र बन सके। आधुनिक समय में बहुत सारे व्यक्ति ऐसे हैं, जो कहानी लिखना चाहते हैं। लेकिन कहानी लिखने के नियम क्या हैं? यह उन्हें नहीं पता होता है, जिससे वह कहानी को कहानी की तरह प्रस्तुत नहीं कर पाते हैं, जिससे उनका लेखन सही नहीं होता है।

kahani लिखने का उद्देश्य केवल अपनी बात को लिख देना नहीं होता है कहानी लिखने का उद्देश्य होना चाहिए, कि पाठक को कहानी पढ़ने समझने तथा सोचने पर मजबूर कर दें, जैसे ही आप कहानी की शुरुआत करते हैं, पाठक को बिल्कुल ऐसा लगना चाहिए कि इस कहानी में कुछ ना कुछ ऐसा जरूर है जो उसके लिए उपयोगी है, तथा उसे उतना ही इंटरेस्ट भी आना चाहिए, जिससे पाठक पूरी कहानी पड़ता है और कहानी के अंत से वह शिक्षा भी ग्रहण करता है।

कहानी को लिखने में सरल भाषा का प्रयोग किया जाता है, जो बहुत ही मुश्किल है क्योंकि बहुत सारे लोगों का कहना है, “कठिन लिखना बहुत सरल है, लेकिन सरल लिखना बहुत ही कठिन।” यह बात बिल्कुल सत्य है किस तरह लिखना बहुत कठिन होता है, ऐसा सरल की सभी के समझ में आ सके। 

यह भी जानें- घर बैठे फ्री में पैसा कमाने वाला गेम खेलें और पैसे सीधे अकाउंट में पायें

कहानी कैसे लिखें

कहानी कैसे लिखें

इसे लिखना एक ऐसी कला है जिसमें आपको विभिन्न प्रकार के एक्सपीरियंस होना अनिवार्य होता है, आपको समाज तथा समाज के लोगों के बारे में अच्छी नॉलेज होनी चाहिए, तथा किसी घटना को लेकर समाज में किस तरह से बातें होती हैं, उसके लिए जानकारी तथा उनकी पकड़ अच्छी होनी चाहिए। यदि आप एक कहानी लिखना चाहते हैं, और आपने कहानी की रूपरेखा तैयार कर ली है तो आपको कहानी की शुरुआत तथा अंत को पहले ही सोच कर रखना होगा।

आपको यह पहले सोचना होगा कि, कहानी की शुरुआत कैसे की जा सकती है, और कहानी का अंत इस प्रकार से होगा। यदि आप इन दो बातों का ध्यान रखते हैं, तो बीच में आपको आपका अनुभव काम देता है। यदि आपका अनुभव समाज के प्रति सामाजिकता के तरफ है, तो निश्चित ही आपकी कहानी बहुत ही अच्छी होगी, क्योंकि समाज में होने वाली बातचीत तथा बातों को यदि आप कहानी में वर्णित करते हैं, तो पाठक उसे बड़े मनोरंजन के साथ पढ़ते तथा समझते हैं।

हमें यह कहना गलत नहीं लगता है कि कहानी समाज का दर्पण होती है, जो समाज के प्रतिबिंब समाज के ही सामने प्रस्तुत करती है, क्योंकि कहानी में यदि सामाजिकता तथा समाज की भावनाओं की कदर नहीं होती है, तो कहानी अरुचिकर हो जाती है, जिसके कारण पाठक कहानी को पसंद नहीं करते हैं।

आपने जिस प्रकार के सामाजिक पाठक को टारगेट करते हुए कहानी को लिखा है, उस क्षेत्र में आपको भाषा की पकड़ तथा उस क्षेत्र के लोकल भाषा तथा चित्रों का वर्णन आपको भली प्रकार से आना चाहिए। क्षेत्रीय भाषा तथा कहानी से संबंधित उस क्षेत्र के वर्णन के कारण कहानी में वास्तविकता तथा मनोरंजन उत्पन्न होता है।

यह भी जानें- Education Loan Interest Rate, Education Loan कहां से और कैसे लेना है

कहानी लिखते समय किन बातों का ध्यान रखें

कहानी लिखते समय किन बातों का ध्यान रखें

कहानी लिखते समय अभी आप कहानी लेखन की प्रमुख बातों का ध्यान में रखते हुए कहानी को लिखते हैं, तो निश्चित रूप से लिखी जाने वाली कहानी रुचिकर तथा उद्देश्य पूर्ण होती है।

कहानी को लिखते समय उसे अलग-अलग भागों में डिवाइड किया जाता है, तथा प्रत्येक भाग के अनुसार ही उसमें भाषा शैली व अन्य विभिन्न प्रकार के भाषाओं तथा घटनाओं का वर्णन किया जाता है, तथा अंत में कहानी स्वाभाविक रूप से समाप्त होने वाली होनी चाहिए तथा कहानी का लिखने का उद्देश्य तथा कहानी की शिक्षा स्पष्ट होनी चाहिए। कहानी के अंत में पाठक को यह नहीं महसूस होना चाहिए की पूरी कहानी के पश्चात भी उसे कहानी का रस प्राप्त नहीं हो पाया है, अर्थात कहानी अंत में अपने पूरे रस को निचोड़ना चाहिए, कहानी लेखन का एक अभिनय होता है।

कहानी लेखन के समय निम्नलिखित बातों का विशेष कर ध्यान देना चाहिए

  • कहानी का आरंभ आकर्षक होना चाहिए।
  • कहानी की भाषा सरल, सरस और मुहावरेदार होनी चाहिए।
  • कहानी की घटनाएँ ठीक क्रम से लिखी जानी चाहिए।
  • कहानी के वाक्य छोटे तथा क्रमबद्ध होने चाहिए।
  • कहानी का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए।
  • कहानी शिक्षाप्रद होनी चाहिए।

कहानी का आरंभ आकर्षक होना चाहिए

कहानी का आरंभ आकर्षक होना चाहिए

Story का वर्णन हमेशा भूतकाल में किया जाता है, इसलिए हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि कहानी लिखने में प्रयुक्त होने वाले शब्द भूतकाल से ही संबंधित होने चाहिए, तथा कहानी की शुरुआत कुछ ऐसे रोचक कथा आकर्षक शब्दों के साथ करना चाहिए कि पढ़ते ही पाठक को यह लगे की कहानी में बहुत इंटरेस्ट आने वाला है। इसके लिए आप कहानी के मुख्य पात्र की कुछ विशेष घटना कहानी के प्रारंभ में रख सकते हैं।

साथ ही साथ आकर्षक शब्दों के साथ कहानी का वर्णन प्रारंभ करना चाहिए, क्योंकि यदि आपने प्रारंभ में आकर्षक शब्दों का वर्णन किया है, तो पाठक पूरी कहानी पढेगा, और यदि आप हैं प्रारंभ में कहानी को जटिल तथा कठिन शब्दों से लिखा है, तो पाठक के समझ में नहीं आएगा और वह कहानी को छोड़कर चला जाएगा। इसलिए प्रारंभ से ही कहानी के शब्दों तथा कहानी की भाषा पर ध्यान देना चाहिए। कहानी के शब्द बहुत ही आसान होने चाहिए, तथा भाषा सबकी समझ में आए ऐसी होनी चाहिए, जो आपके कहानी लेखन की कला पर निर्भर करता है।

यह भी जानें- MMJKY- MP Mukhyamantri Jankalyan Shiksha Protsahan Yojana

कहानी की भाषा सरल, सरस और मुहावरेदार होनी चाहिए

कथा पढ़ना और समझना जितना आसान होता है, कहानी लिखना उतना ही मुश्किल होता है। कहानी को लिखने में प्रयोग की गई भाषा सरल और सरस होनी चाहिए जिससे पढ़ने वाले को कहानी को समझने में किसी प्रकार की समस्या ना हो, और पढ़ते ही पाठक को कहानी समझ में आना चाहिए। इसलिए कहानी में प्रयोग की गई भाषा बहुत ही आसान तथा क्षेत्रीय होनी चाहिए।

इसलिए कहानी लिखते समय ध्यान देना चाहिए, कि कहानी की भाषा सरल हो तथा कहानी को मजेदार बनाने के लिए उसमें लोकल भाषा में प्रयोग किए जाने वाले मुहावरे लोकोक्तियां तथा अन्य सरल शब्दों का प्रयोग किया गया हो, जो कहानी की रोचकता तथा पाठक के इंटरेस्ट को बढ़ा देते हैं, जिससे कहानी लोगों में लोकप्रिय होती है। इसलिए कहानी लिखते समय भाषा का प्रयोग सरल, सरस तथा मुहावरेदार होना चाहिए। 

कहानी की घटनाएँ ठीक क्रम से लिखी जानी चाहिए

कहानी की घटनाएँ ठीक क्रम से लिखी जानी चाहिए कहानी लिखने के नियम क्या है

किसी भी कहानी को लिखने के पहले कहानी का क्रम सही से तैयार कर लेना चाहिए। यानी कहानी लिखने से पहले ही कहानी का ढांचा पूरी तरह से तैयार होना चाहिए, जिससे कहानी लिखते समय कहीं भी कहानी के क्रम में ऊपर नीचे ना हो सके, क्योंकि यदि कहानी का क्रम आगे पीछे हो जाता है तो कहानी पाठक के लिए बहुत ही मुश्किल हो जाती है, और कहानी समझना बड़ा मुश्किल हो जाता है, जिससे कहानी पढ़ने का इंटरेस्ट समाप्त हो जाता है।

क्रम को किसी वास्तविक घटना के अनुसार रखना चाहिए, जिससे पाठक को कहानी पढ़ते समय वास्तविक घटना का एहसास हो सके, और पाठक को कहानी वास्तविक चित्रण की तरह प्रतीत होनी चाहिए। इसलिए कहानी के घटनाक्रम को क्रमबद्ध तरीके से ही दर्शाना चाहिए। कहानी की घटना को यदि हम क्रम वाले तरीके से दर्शाते हैं तो कहानी में वास्तविकता आ जाती है, और कहानी एक जीवंत घटना हो जाती हैं, जो पाठक के लिए बहुत ही इंटरेस्टिंग होती है, किसलिए कहानी लिखते समय घटनाओं को एक क्रम में लिखना चाहिए, और कहानी को शुरू से अंत तक क्रमबद्ध तरीके से ही तैयार करना चाहिए।

कहानी के वाक्य छोटे तथा क्रमबद्ध होने चाहिए

kahani लिखते समय शब्दों तथा वाक्यों की फॉर्मेटिंग पर बहुत ज्यादा ध्यान देना चाहिए, वाक्य बहुत अधिक लंबे तथा कठिन शब्द वाले नहीं होने चाहिए तथा वाक्य लिखते समय छोटे-छोटे वाक्यों का प्रयोग करना चाहिए। यदि हम कहानी में छोटे-छोटे वाक्यों का प्रयोग करते हैं, तो कहानी समझने में बहुत आसान होती है जिससे पाठक को पढ़ते समय बोरिंग नहीं होने देती है, जिस प्रकार घर में क्रमबद्ध रखी हुई चीजें अच्छे दिखती हैं, उसी प्रकार यदि कहानी लिखते समय शब्दों तथा वाक्यों का चयन क्रमबद्ध तरीके से किया जाता है, तो कहानी पढ़ने में सुंदर तथा मनोरंजक लगती है।

इसलिए कहानी में छोटे-छोटे वाक्यों का प्रयोग किया जाता है, जो बच्चे तथा बड़ों सभी को बड़ी आसानी से समझ में आ जाते हैं। कहानी में छोटे-छोटे तथा मनोरंजक वाक्यों का प्रयोग करने से कहानी पढ़ने तथा समझने में आसानी रहती है, तथा यदि पाठक कहानी को पढ़ते समय ही समझ लेता है तो उसके मन में कहानी पढ़ने का इंटरेस्ट बढ़ता जाता है। इसलिए कहानी लिखते समय छोटे तथा क्रमबद्ध वाक्यों का प्रयोग करना चाहिए।

यह भी जानें- सबसे ज्यादा रन बनाने वाली महिला खिलाड़ी कौन है?

कहानी का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए

कहानी का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए कहानी लिखने के नियम क्या है

जिस प्रकार से कार्य को करने से पहले हम उसका परिणाम क्या होगा तथा हम यह कार्य किस उद्देश्य से कर रहे हैं, कहानी लिखने के नियम क्या है इसकी जानकारी हमें होती है उसी प्रकार कहानी लिखने का उद्देश्य क्या है यह हमें स्पष्ट होना चाहिए। हम कहानी किस उद्देश्य से लिख रहे हैं तथा कहानी का परिणाम क्या होगा इसके बारे में हमें पूरी तरह से पहले ही स्पष्ट होना चाहिए। कहानी का उद्देश्य स्पष्ट होने के कारण कहानी की भाषा तथा शब्द वह वाक्य प्रयोग उसी तरह से करना चाहिए, जिससे कहानी पढ़ने तथा समझने में आसान हो जाती है।

कथा के विभिन्न उद्देश्य हो सकते हैं, कहानी किसी ऐतिहासिक घटना किसी वास्तविक घटना तथा किसी काल्पनिक घटना को प्रदर्शित कर सकती है। आप जिस प्रकार की घटना का प्रदर्शन करना चाहते हैं, कहानी लिखते समय उसी प्रकार के शब्दों तथा वाक्यों का प्रयोग किया जाता है। इसलिए कहानी लिखने का उद्देश्य पहले से ही स्पष्ट होना चाहिए, जिससे कहानी को सुंदर तथा आकर्षक भाषा में लिखा जा सके।

कहानी शिक्षाप्रद होनी चाहिए

पूरी कहानी पढ़ने के पश्चात जब हम कहानी के अंत में पहुंचते हैं तो कहानी की शिक्षा का उल्लेख किया जाता है, जिससे पाठक को यह समझ में भी आ जाता है, कि इस कहानी को पढ़ने के पश्चात हमें किस प्रकार की शिक्षा लेनी चाहिए। इसलिए कहानी लिखते समय कहानी के उद्देश्य के साथ साथ कहानी की शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए, कहानी के लास्ट में पाठक को कहानी से किसी प्रकार की सीख यह शिक्षा मिलनी चाहिए,

जिससे कहानी पढ़ने के साथ-साथ पाठक को कुछ प्रकार के बातें सीखने तथा समझने का भी मौका मिल सके तथा  शिक्षा पूर्ण कहानियां बच्चों के लिए बहुत ही उपयोगी होती है, तथा शिक्षा पूर्ण कहानियां बच्चों का मार्गदर्शन भी करती हैं, इसलिए कहानी में एक विशेष प्रकार की शिक्षा भी अवश्य होनी चाहिए, जिससे एक विशेष प्रकार के समूह को कहानी पढ़ने के पश्चात शिक्षा दी जा सके तथा कहानी को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। 

कहानी लेखन फॉर्मेट

Story लिखते समय कहानी का फॉर्मेट प्रोफेशनल होना चाहिए तथा कहानी को क्रमबद्ध तरीके से फॉर्मेटिंग करनी चाहिए, जिससे कहानी पढ़ने में तथा समझने में आसानी रहे। कहानी लेखन एक कला है जो लेखक को सभी से अलग बनाती है अर्थात कहानी लिखने वाला व्यक्ति तथा सामान्य व्यक्ति में बहुत बड़ा अंतर होता है, क्योंकि कहानी लेखक किसी भी बात को कहने के लिए ऐसे वाक्य व तरीकों को अपनाता है जिससे वह बात वास्तविक तथा जीवंत लगने लगती है, क्योंकि कहानी लेखक प्रत्येक बात को क्रमबद्ध तथा सही तरीके से कहने तथा लिखने की कोशिश करता है।

अतः अगर कहानी क्रमबद्ध सही तरीके से लिखी जाती है, तो कहानी समझ में पढ़ने में आसान तथा इंटरेस्टेड हो जाती है, इसलिए कहानी की फॉर्मेटिंग बहुत ही आवश्यक होती है। कहानी की फॉर्मेटिंग में निम्नलिखित चीजों का ध्यान रखना चाहिए

  • शीर्षक
  • शुरुआत
  • चरित्र परिचय
  • प्लॉट 
  • क्लाइमेक्स
  • समापन
  • निष्कर्ष

शीर्षक

शीर्षक

कहानी का शीर्षक ही कहानी का आकर्षण होना चाहिए कहानी को लिखने से पूर्व कहानी के घटना तथा कहानी के चित्रण के बारे में अच्छी तरह से सोच कर कहानी का शीर्षक रखना चाहिए। कहानी का शीर्षक कहानी की रूपरेखा तथा उद्देश्य के साथ साथ शिक्षा को स्पष्ट करता हो, अर्थात कहानी का अंत होने के पूर्व कहानी से मिलने वाली शिक्षा तथा शीर्षक में संबंध होना चाहिए।

यदि शिक्षा और शीर्षक में संबंध होता है, तो पाठक को कहानी आकर्षित करती है और पाठक कहानी को पढ़ना प्रारंभ करता है। इसलिए कहानी लिखने से पूर्व कहानी का शीर्षक लिखना चाहिए, तथा शीर्षक के आधार पर एक कहानी के शिक्षा तथा कहानी का वर्णन होना चाहिए। कहानी का शीर्षक ही पाठक को अपनी और आकर्षित करता है, इसलिए कहानी का शीर्षक आकर्षक होना चाहिए।

यह भी जानें- Yorker Ball Kasie Dala Jata Hai | यॉर्कर बॉल क्या होती है

शुरुआत

Kahani की शुरुआत यदि आकर्षक तथा इंटरेस्टेड होती है, तो कहानी पाठक के मन को आकर्षित करते हैं, इसलिए कहानी की शुरुआत आकर्षक भाषा तथा शब्दों से करनी चाहिए तथा कहानी के प्रारंभ में ही कुछ ऐसे शब्दों में भाषा का प्रयोग करना चाहिए। जिससे पाठक पूरी कहानी को पढ़ने की कोशिश करें तथा बिना पढ़े पूरी कहानी को ना छोड़े। कहानी लिखने के नियम क्या है कहानी के शुरुआत में ही कुछ ऐसे सस्पेंस पूर्ण भाषा तथा वाक्यों का प्रयोग करना चाहिए, जिससे पाठक को यह लगे की कहानी में बहुत अच्छी शिक्षा तथा घटना छिपी है, तथा पढ़ने वाले के दिमाग में कुछ क्रिएटिव आइडिया व घटनाएं आ जाते हैं, जिससे कहानी पढ़ने में इंटरेस्टिंग हो जाती है।

चरित्र परिचय

स्टोरी के चरित्र कहानी के लिए बहुत ही उपयोगी तथा आकर्षण का केंद्र होते हैं, यदि कहानी में प्रयोग किए जाने वाले चरित्र आकर्षक तथा स्पष्ट नाम तथा घटना से संबंधित होते हैं तो यह पाठक के आकर्षण का केंद्र बनते हैं। इसलिए कहानी लिखते समय कहानी के चरित्र परिचय पर बहुत अधिक ध्यान देना चाहिए चरित्र परिचय करते समय बहुत अधिक शब्दों तथा वाक्यों का प्रयोग ना करते हुए कहानी की मुख्य भाषा में है चरित्र का परिचय दे देना चाहिए जिससे कहानी का वर्णन भी स्पष्ट रहता है, तथा पाठक को चरित्र के परिचय के बारे में पढ़ने तथा जानने में अधिक बोरिंग नहीं होता है, तथा पाठक को चरित्र का परिचय भी प्राप्त हो जाता है।

इसलिए कहानी लिखते समय ऐसी भाषा का प्रयोग करना चाहिए कि उसमें चरित्र का परिचय तथा कहानी दोनों ही साथ साथ लिखा जा सके। कहानी लिखते समय कहानी का चरित्र परिचय वास्तविक तथा आकर्षक होना चाहिए। 

प्लॉट 

प्लांट कहानी लिखने के नियम क्या है का मुख्य हिस्सा होता है अर्थात इसे हम कहानी के बॉडी भी कह सकते हैं, कहानी का शीर्षक शुरुआत करने के पश्चात हम कहानी को किस प्रकार से लिखते हैं, तथा उसमें किन-किन घटनाओं का वर्णन करते हैं, उसे हम कहानी की बॉडी कहते हैं। कहानी बहुत अधिक लंबी नहीं होनी चाहिए तथा कहानी की गहराई पाठक के अनुसार होनी चाहिए, बहुत ही अच्छी कहानियां होती हैं जिनको लंबा लिखने की आवश्यकता होती है, अर्थात उनकी घटनाओं को हम लिखते समय शॉर्ट में नहीं बता सकते हैं।

 हम ऐसा करते हैं तो कहानी अरुचिकर लगने लगती है, इसलिए कहानी की बॉडी लिखते समय जिस जगह पर जितनी लंबी वाक्य तथा स्पष्टता करने की आवश्यकता हो करनी चाहिए। कहानी की बॉडी कहानी का मुख्य भाग होती है यह पाठक को अधिक समय तक पढ़ने तथा इंटरेस्ट जगाने में मदद करती है।

क्लाइमेक्स

क्लाइमेक्स

क्लाइमैक्स लिखते समय कहानी शीर्षक तथा शिक्षा के साथ-साथ कहानी के मध्य में क्लाइमेक्स होना बहुत ही आवश्यक होता है। कहानी के मध्य में क्लाइमैक्स पाठक के इंटरेस्ट को बढ़ा देता है, तथा कहानी में नई संभावनाएं उत्पन्न हो जाती हैं, इसलिए कहानी लेखन के समय कहानी के मध्य में एक विशेष प्रकार के क्लाइमेक्स लेखन का प्रयोग करना चाहिए, जिससे पाठक को सरप्राइस होता है, और पाठक का इंटरेस्ट बढ़ता है तथा कहानी में एक नए घटना तथा चरित्र का अवतार होता है। कहानी एक नया रूप लेती है इसलिए कहानी में क्लाइमैक्स होना बहुत आवश्यक होता है। 

समापन

 समापन कहानी को समाप्ति की ओर ले जाता है, कहानी का यह पार्ट प्रत्येक चरित्र तथा घटना को समावेशित करते हुए अंत की तरफ बढ़ता है, तथा समापन में कहानी का शिक्षा तथा उद्देश्य स्पष्ट दर्द दिखाई देता है। समापन में चरित्र तथा घटना का परिणाम व उद्देश्य प्रदर्शित होता है। समापन में ही कहानी की शिक्षा पर भी प्रकाश डालते हैं तथा चरित्र की महानता तथा अच्छाई का वर्णन किया जाता है, तथा कहानी का सुखांत है, या दुखांत इसके बारे में भी प्रकाश डाला जाता है, अर्थात हम कह सकते हैं कि कहानी का समापन कहानी का सारांश होता है।

अंतिम सार

अंतिम सार कहानी का निष्कर्ष होता है जिसमें कहानी की शिक्षा तथा कहानी के उद्देश्य पर प्रकाश डाला जाता है। कहानी का निष्कर्ष कहानी की समापन लाइनें होती हैं जिनके द्वारा कहानी को समाप्त किया जाता है, तथा चरित्रों का चरित्र समाप्त हो जाता है तथा अंत में कहानी के निष्कर्ष में कहानी की शिक्षा निकल कर आती है इस प्रकार पूरी कहानी का निष्कर्ष अर्थात सार का वर्णन हम कहानी के अंत में कहते हैं, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण कहानी से मिलने वाली शिक्षा तथा कहानी का उद्देश्य होता है। 

यह भी जानें- ई श्रमिक कार्ड के फायदे जाने क्या मिलेंगे 2022-23 में फायदे

कहानी लेखन के लिए गाइड

कहानी लेखन के लिए गाइड कहानी लिखने के नियम क्या है

यदि आपने कभी भी कहान लेखन नहीं किया है तो आपको कहानी लिखने के लिए कहानी लिखने के नियम क्या है, इसकी जानकारी होना बहुत ही आवश्यक होता है, क्योंकि कहानी को वास्तविक तथा सत्य आधारित घटना बनाने के लिए कहानी के विभिन्न पहलुओं की जानकारी होना बहुत ही आवश्यक होता है। कहानी लिखने से पहले कहानी लिखने के बारे में गाइडेंस लेना बहुत ही आवश्यकता है।

लेखन गाइडेंस लेने के लिए किसी ऐसे लेखक तथा व्यक्ति का चयन करना चाहिए, जिसने पहले भी विभिन्न प्रकार की कहानियां लिखी हैं, तथा कहानी लिखने के लिए खुले विचारों तथा क्रिएटिव माइंड का प्रयोग करना चाहिए, जो कहानी की वास्तविकता तथा कहानी में मनोरंजन उत्पन्न करने में बहुत ही हेल्प करता है, जो लोग कहानी लिखने के लिए विशेष प्रकार के गाइड द्वारा जानकारी लेना चाहते हैं उनके लिए आज हम कहानी से संबंधित कुछ गाइडेंस उपलब्ध करा रहे हैं। जो निम्नलिखित है 

  • विचार करें
  • एक बेसिक रूपरेखा तैयार करें
  • नायक पर ध्यान दें
  • एक गहन पहली पंक्ति लिखें
  • चरित्रों का निर्माण
  • लिखें, एडिट एंड रिपीट

कहानी लेखन की विधियां

लेखन एक ऐसी कला है जिसमें विभिन्न प्रकार की विधियों का प्रयोग किया जाता है, कहानी लिखने से पहले हमें विभिन्न प्रकार के विधियों की जानकारी होना आवश्यक है, क्योंकि किस परिस्थिति में कैसे कहानी को लिखना है तथा कहानी के अनुसार परिस्थिति को बनाना है। यह कहानी द्वारा ही संभव हो सकता है तथा कहानी में यह संभावना लेखक द्वारा ही उत्पन्न की जा सकती है, कहानी लेखन की विधियों के आधार पर ही हम कहानी का वर्णन तथा कहानी को पूरा कर सकते हैं। इसलिए कहानी लेखन से पहले कहानी लेखन की विधियां जानी चाहिए, जो निम्नलिखित हैं 

  • कहानी की सहायता के आधार पर कहानी लिखना
  • रूपरेखा के सहारे कहानी लिखना
  • अधूरी या अपूर्ण कहानी को पूर्ण करना
  • चित्रों की सहायता से कहानी का अभ्यास करना

निष्कर्ष

कहानी लिखना एक ऐसी कला है जो सभी के बस की बात नहीं है, यह कला हमारी मानसिकता को विकसित करती है तथा हमें विभिन्न प्रकार के पहलुओं पर सोचने की ताकत प्रदान करती है। कहानी लेखन से हम अपनी जिंदगी को भी चला सकते हैं, अर्थात कहानी लिखने में जिस प्रकार के क्रिएटिविटी का प्रयोग किया जाता है, उसका प्रयोग करते हुए अपने जीवन को भी सुव्यवस्थित तथा सुरक्षित तरीके से चला सकते हैं।

स्टोरीलेखन बहुत बड़ी कला होती है जिस प्रकार कहानीकार असत्य तथा कल्पनीय घटनाओं को वास्तविक घटनाओं में परिवर्तित करते हैं। यह सबके बस की बात नहीं होती है, इसलिए कहानी लिखने के नियम क्या है यह उनके लिए बहुत ही आवश्यक होता है, जो कहानी को लिखने तथा खाने को वास्तविक बनाने में कहानी लेखक की मदद करते हैं। उपरोक्त लेख में विभिन्न प्रकार के तरीके बताए गए हैं जिनके अध्ययन के पश्चात कहानी लिखने में आसानी हो जाती है। 

FAQ’s

कहानी लिखने की शुरुआत कैसे करें?

 लेखन की शुरुआत करने के लिए कहानी की रूपरेखा कथा कहानी का शीर्षक के साथ-साथ कहानी की शिक्षा को भी ध्यान में रखते हुए सारी बातें पहले सोच लेना चाहिए, तथा कहानी की एक रूपरेखा तैयार करने के पश्चात ही कहानी को परिचय से प्रारंभ करना चाहिए। कहानी आपको जिस क्षेत्र में लिखनी है उस क्षेत्र का परिचय देते हुए कहानी की शुरुआत की जा सकती है। 

कहानी लिखते समय क्या ध्यान में रखना चाहिए?

कहानी लिखते समय विभिन्न प्रकार की बातों को ध्यान में रखा जा सकता है। कहानी के चरित्र तथा उनका परिचय कहानी की रूपरेखा कहानी का ढांचा तथा कहानी से मिलने वाली शिक्षा आदि बातों पर ध्यान रखते हुए कहानी का वर्णन करना चाहिए, तथा कहानी में उपरोक्त सभी चीजें होना भी आवश्यक होता है, कि तू किसी भी चरित्र या घटना का वर्णन ना ही बहुत कम शब्दों में करना चाहिए, और अधिक गहराई में भी नहीं जाना चाहिए, इसके साथ-साथ कहानी से मिलने वाली शिक्षा स्पष्ट होनी चाहिए तथा कहानी के अनुसार ही कहानी के चरित्र भी होने चाहिए।

कहानी आरम्भ करने की मुख्य विधियाँ कितनी है?

स्टोरीज लेखन के लिए आपके पास सबसे पहले कहानी का शीर्षक तथा कहानी की शिक्षा के अनुसार उसकी कथावस्तु होनी चाहिए। कहानी की कथावस्तु के अनुसार ही कहानी के चरित्रों का वर्णन किया जाता है, जिसे हम चरित्र चित्रण के नाम से जानते हैं। चरित्र चित्रण के आधार पर ही कहानी में चरित्र की भूमिका दी जाती है, तथा कहानी को प्रारंभ करने के लिए घटना तथा चरित्र वर्णन किया जा सकता है।

Leave a Comment